यह थार की हनक ही है… कि इसकी ड्राइविंग सीट पर बैठने के बाद इंसान, इंसान नहीं रह जाता है। पता नहीं वह घर से निकलते वक्त इंसानियत को खूंटी पर टांग कर थार की ड्राइविंग सीट पर बैठता है या ड्राइविंग सीट पर बैठने के बाद इंसानियत का चोला उतारकर पिछली सीट पर फेंक देता है। आए दिन थार से लोगों को कुचले जाने की खबरों के बाद एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है .इतने पानी में वह स्पीड तो नहीं मिल सकती कि किसी को राह चलते को कुचल दे लेकिन किसी का मानमर्दन जरूर किया जा सकता है। किसी पैदल चलते, अपनी बुजुर्ग मां को मोटरसाइकिल पर बिठाकर जैसे तैसे पानी को पार कर रहे को औकात जरूर दिखाई जा सकती है कि देख मैं थार में आ रहा हूं।दृश्य मारवाड़ के लोहावट का है और गाड़ी थार है। मारवाड़ की अपणायत भी बहुत प्रसिद्ध है और थार की अपणायत भी एक परंपरा के तौर पर स्थापित है लेकिन यहां गाड़ी का नाम थार है। चालक कोई मारवाड़ी ही होगा। कहीं किसी अपणायत, सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, मानवता के दर्शन नहीं हो रहे। ड्राइवर को बहुत अच्छे से पता है कि उसकी थोड़ी सी भी स्पीड सामने वाली बाइक को इंबैलेंस करेगी लेकिन यही तो वह करना चाह रहा है। थार के लिए पैसा जो खर्च किया है। औरों की तरह किसी को बड़ा नुकसान तो पहुंचा ही नहीं रहा। सिर्फ अहसास ही तो करवाना है सामने वाले को कि तुम मेरे से कमतर हो। तो बस, बिगाड़ दिया बैलेंस। हमारी परंपराओं का, हमारी संस्कृति का, हमारी अपणायत का। मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर बैठी बुजुर्ग मां ने बेटे को काफी मजबूत बनाया है। वे खुद भी मजबूत हैं। इतनी कि थार की पैदा की गई लहर उनको डिगा तो पाई लेकिन डुबा नहीं पाई। आम भारतीय इसी तरह, इसी ताकत से तो मैदान में टिका हुआ है। खैर! किसी को कतई शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। समय ऐसा ही है। और बिगाड़ ही होना है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में थार चालक की इस हरकत को लेकर गुस्सा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में पहले ही सड़कें खतरनाक हो जाती हैं, ऐसे में इस तरह की लापरवाही दूसरों की जान को खतरे में डाल सकती है. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लापरवाह चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों. बारिश के मौसम में प्रशासन ने सतर्क रहने की सलाह दी. ऐसी जगहों पर जाने के लिए चेतावनी दी है.
