पाकिस्तान को ट्रंप ने ऐसा फंसाया है कि उसकी अब हालत खराब हुई पड़ी है .ट्रंप ने ईरान पर हमले से पहले एक ऐसा जाल फेंका था.जिसमें से भारत तो बचकर निकल आया लेकिन पाकिस्तान अपने आका ट्रंप के जाल में फंस ही गया.उसे अंदाजा नही था कि अमेरिका उसका इस्तेमाल ऐसा करेगा कि वो इस्लामिक नेशन में मुंह दिखाने लायक भी नहीं बचेगा….हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति ने डिनर पर इनवाइट किया था.अमेरिका में पाकिस्तानी आर्मी चीफ की अच्छे से खातिरदारी भी हुई जिससे पाकिस्तान को ये लगने लगा कि अब अमेरिका हमें पूरी तरह से सहयोग करेगा.लेकिन उसको ये नहीं पता था कि आसिफ मुनीर के लिए ये डिनर इतना महंगा पडेगा और इसका बिल भी इतना महंगा पडेगा.ट्रंप ने जो रणनीति अपनाई उससे शायद पाकिस्तान अनजान था.ट्रंप चाहता था कि पाकिस्तान का इस्तेमाल करके ईरान पर हमला किया जाए.लेकिन पाकिस्तान को नही पता था कि पर्दे के पीछे ये सब चल रहा है .जैसे ही मुनीर पाकिस्तान से निकले तो अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया.इसके बाद पाकिस्तान को भी हडबडाहट में हमले की निंदा करनी पडी .लेकिन सच्चाई और कई रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान लगातार अमेरिका की मदद कर रहा था.और ईरान की जासूसी कर रहा था.और हमले से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ये सारी जानकारी भी जुटाई.जिसके बाद ये तो तय हो गया कि इस्लामिक नेशन का मसीहा बनने वाला पाकिस्तान ईरान के खिलाफ ही साजिशें करने में जुटा था.उसको इसका अंदाजा नही है कि इसका परिणाम क्या होने वाला है .क्योंकि अमेरिका की गोद में बैठे पाकिस्तान को गोद से उतारने का काम अब ईरान ही करेगा.और उसकी तैयारी भी हो चुकी है .आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से मिलने वाली भीख के लिए पाकिस्तान ने अपना ईमान भी ट्रंप के हाथों बेच दिया जिसका भुगतान शायद ईरान की जनता कर रही है.लेकिन ट्रंप की नीति को समझने के लिए शायद पाकिस्तान को भारत से ही ज्ञान ले लेना चाहिए.क्योंकि पीएम मोदी ने जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति के न्यौते को अस्वीकार किया था.वो शायद उनका सही फैसला था.क्योंकि अगर मोदी ट्रंप से मिलने जाते तो सीधा सीधा दोष शायद भारत पर भी ईरानी सरकार की ओर मढा जाता ..
