चिकनगुनिया मच्छर जनित यह बीमारी अब केवल उष्णकटिबंधीय इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। क्या है चिकनगुनिया, इसके लक्षण, इससे बचाव और क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठनों की तैयारी – सबकुछ विस्तार से बताएंगे, बने रहिए हमारे साथ। चिकनगुनिया—एक ऐसा नाम जिसे कुछ साल पहले भारत और दुनिया के कई देशों ने बखूबी जाना और महसूस किया था। अब एक बार फिर यह वायरस चर्चा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य चिकित्सा संस्थाएं इसे लेकर अलर्ट जारी कर चुकी हैं क्योंकि कई देशों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।चिकनगुनिया एक वायरल रोग है, जो एडीज़ मच्छरों के काटने से फैलता है। इसका मुख्य लक्षण होता है तेज बुखार और गंभीर जोड़ों में दर्द। यह दर्द इतना तीव्र होता है कि रोगी सामान्य गतिविधियां भी नहीं कर पाता। इसके साथ ही सिरदर्द, थकान, त्वचा पर चकत्ते और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।हाल ही में अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और यहां तक कि यूरोप के कुछ देशों में भी इसके केस सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, असंतुलित शहरीकरण और साफ-सफाई की कमी की वजह से मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है।भारत में भी कुछ राज्यों जैसे कि केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से ताज़ा मामले रिपोर्ट हुए हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतर्कता बढ़ाने के आदेश दे दिए हैं। खासतौर पर मानसून के मौसम में ऐसे वायरस तेजी से फैलते हैं क्योंकि पानी रुकने से मच्छरों की आबादी बढ़ जाती है।चिकनगुनिया का फिलहाल कोई विशेष टीका या एंटीवायरल इलाज नहीं है। उपचार केवल लक्षणों को कम करने पर आधारित होता है—जैसे दर्द निवारक दवाएं, आराम और पानी की पर्याप्त मात्रा। डॉक्टरों का मानना है कि बीमारी गंभीर न भी हो, पर ठीक होने में समय लगता है और कई बार महीनों तक जोड़ों का दर्द बना रहता है। WHO ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि दुनिया भर के देशों को मच्छर जनित रोगों से निपटने की रणनीति को और मज़बूत करने की ज़रूरत है। इसमें स्वच्छता, जागरूकता अभियान और प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना अहम है।
